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आजादी के 70 सालों में देश में हुए ये 10 बड़े आतंकी हमले


नई दिल्ली (13 अगस्त):
देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद हुए 70 साल होने जा रहे हैं। इन 70 सालों में देशवासियों को अच्छे और बुरे दोनों तरह के अनुभवों से गुजरना पड़ा। लोगों को लगा कि पाकिस्तान के अलग होने से शायद अब देश तरक्की की राह पर तेजी से आगे बढ़ेगा, लेकिन दोनों देशों के बीच हुए इसी बंटवारे के साथ ही देश को अभी तक कई ऐसे जख्म झेलने पड़े हैं जो आसानी से भुलाए नहीं जा सकते।

आजादी के समय भारत का हिस्सा रहा पाकिस्तान इस समय आतंकवादियों के जरिए नरसंहार करके हमारे देश की आत्मा को छलनी करने की कोशिश करता है। हालांकि आमने-सामने के युद्ध में उसे हमेशा ही मुंह की खानी पड़ी है, शायद इसीलिए पाकिस्तान की धरती से बार-बार आतंकवादी भेजकर मासूमों का खून बहाया जाता है।

1. 26/11 मुंबई आतंकी हमला:
देश में हुआ यह अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला था। 26 नवंबर की रात को शुरू हुआ यह आतंकी हमला 29 नवंबर को अजमल आमिर कसाब के अलावा सभी आतंकियों के खात्मे के साथ समाप्त हुआ। इस हमले में देसी-विदेशी कुल 166 लोग मारे गए और 293 लोग घायल हुए थे। एकमात्र आतंकी अजमल आमिर कसाब पकड़ा गया, जिसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के बाद फांसी की सजा दी गई।

2. 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट:
12 मार्च 1993 को भारत के इतिहास में ब्लैक फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में कुल 12 धमाके हुए। इन सिलसिलेवार धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इन धमाकों के पीछे अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसकी डी कंपनी का हाथ था।

3. 2002 अक्षरधाम मंदिर पर हमला:
गुजरात के गांधीनगर में अक्षरधाम मंदिर परिसर में 24 सितंबर 2002 को आतंकवादियों के नापाक कदम पड़े। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों ने मंदिर परिसर में घुसकर बेकसूरों का खून बहाया। इसमें 31 लोग मारे गए, जबकि 80 लोग घायल हो गए थे।

4. 2005 दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट:
दीपावली से ठीक दो दिन पहले 29 अक्टूबर 2005 को दिल्ली में हुए सीरियल बम ब्लास्ट ने राजधानी को दलहा दिया। सरोजनी नगर की व्यस्त मार्केट, पहाड़गंज के मुख्य बाजार और गोविंदपुरी में एक डीटीसी बस में हुए इन धमाकों में कुल 63 लोगों की मौत हुई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

5. 2006 मुंबई ट्रेन धमाके:
11 जुलाई 2006 को मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में 7 बम धमाके हुए। इसमें मृतकों की संख्या भी 210 तक पहुंच गई थी, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

6. 2008 जयपुर धमाके:
राजस्थान की राजधानी और पिंक सिटी नाम से मशहूर जयपुर में 13 मई 2008 को शाम साढ़े सात बजे के आसपास 15 मिनट के अंदर 9 बम धमाके हुए। आतंकियों ने इन धमाकों से पिंक सिटी को लाल करने की साजिश रची और इन धमाकों में 63 लोगों जान चली गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

7. 2008 असम में धमाके:
असम में 30 अक्टूबर 2008 को विभिन्न इलाकों में कुल 18 धमाके हुए। आतंकियों ने उत्तर पूर्व राज्य को खून से रंगने की बड़ी साजिश रची थी। इन धमाकों में कुल 81 लोगों की मौत हो गई और साढ़े चार सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

8. 2001 भारतीय संसद पर हमला:
13 दिसबंर 2001 को पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकवादी एके 47, हैंड ग्रेनेड और पिस्तौलों के साथ संसद भवन के परिसर में घुसने में सफल रहे। मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को मार गिराया, लेकिन इस कार्रवाई में 6 पुलिसकर्मी व संसद भवन ने 3 कर्मचारी शहीद हो गए।

9. समझौता एक्सप्रेस विस्फोट:
भारत और पाकिस्तान के नागरिकों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन को भी आतंकवादियों ने नहीं बख्शा। हफ्ते में दो दिन चलने वाली यह ट्रेन 18 फरवरी 2007 को ट्रेन दिल्ली से पाकिस्तान में लाहौर की ओर जा रही थी। आतंकवादियों ने ट्रेन के दो डिब्बों में बम रखे थे जो दिल्ली से करीब 80 किमी दूर पानीपत के पास फट गए। इन धमाकों में 68 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए थे।

10. अजमेर दरगाह धमाका:
11 अक्टूबर 2007 की शाम आतंकवादियों ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के अहाता-ए-नूर के पास जोरदार बम धमाके को अंजाम दिया। इस धमाके में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 अन्य घायल हो गए थे।

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